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बिहार की 153 नगर पंचायतों को बड़ी सौगात, जनप्रतिनिधियों के मानदेय के लिए 1.54 करोड़ रुपये जारी

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बिहार सरकार ने राज्य की 153 नगर पंचायतों के जनप्रतिनिधियों के मानदेय भुगतान के लिए 1 करोड़ 54 लाख 92 हजार रुपये की राशि स्वीकृत की है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के पहले चार महीनों के लिए यह अनुदान जारी किया गया है।

पटना/आलम की खबर:बिहार सरकार ने राज्य की नगर पंचायतों में कार्यरत जनप्रतिनिधियों को बड़ी राहत देते हुए उनके मानदेय भुगतान के लिए महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता स्वीकृत की है। नगर विकास एवं आवास विभाग की ओर से जारी आदेश के बाद अब राज्य की 153 नगर पंचायतों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और वार्ड पार्षदों को वित्तीय वर्ष 2026-27 के शुरुआती चार महीनों का मानदेय मिलने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। सरकार के इस फैसले को स्थानीय निकायों को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

स्थानीय स्वशासन संस्थाएं लोकतंत्र की सबसे निचली लेकिन सबसे महत्वपूर्ण इकाई मानी जाती हैं। नगर पंचायतों के माध्यम से ही नागरिकों की दैनिक जरूरतों से जुड़ी अनेक योजनाओं का संचालन और निगरानी की जाती है। ऐसे में जनप्रतिनिधियों को नियमित मानदेय उपलब्ध कराना प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए आवश्यक माना जाता है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए सरकार ने करोड़ों रुपये की राशि स्वीकृत की है ताकि जनप्रतिनिधियों को समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जा सके।

नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 के प्रथम चार महीनों के लिए सहायक अनुदान के रूप में कुल 1 करोड़ 54 लाख 92 हजार रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। यह राशि राज्य की सभी 153 नगर पंचायतों के बीच निर्धारित प्रावधानों के तहत वितरित की जाएगी। विभाग का कहना है कि राशि का वितरण पूरी तरह पारदर्शी तरीके से किया जाएगा ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना न रहे।

सरकार ने इस बार भुगतान प्रक्रिया को और अधिक सरल और पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल माध्यम को प्राथमिकता दी है। विभागीय निर्देशों के अनुसार स्वीकृत राशि सीधे नगर पंचायतों के पीएल खातों में ऑनलाइन ट्रांसफर की जाएगी। इसके लिए सीएफएमएस प्रणाली का उपयोग किया जाएगा। इस व्यवस्था से भुगतान प्रक्रिया तेज होगी और राशि सीधे संबंधित निकायों तक पहुंचेगी। साथ ही वित्तीय निगरानी भी पहले की तुलना में अधिक प्रभावी हो सकेगी।

जानकारों का मानना है कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था लागू होने से स्थानीय निकायों को समय पर धनराशि उपलब्ध होगी और अनावश्यक प्रशासनिक विलंब से भी बचा जा सकेगा। पिछले कुछ वर्षों में राज्य सरकार विभिन्न विभागों में डिजिटल वित्तीय प्रबंधन को बढ़ावा दे रही है और नगर पंचायतों के लिए यह निर्णय उसी दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

नगर पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और वार्ड पार्षद अपने-अपने क्षेत्रों में विकास योजनाओं की निगरानी और नागरिक समस्याओं के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सड़क, नाली, पेयजल, स्ट्रीट लाइट, सफाई व्यवस्था और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर जनप्रतिनिधियों को लगातार सक्रिय रहना पड़ता है। ऐसे में मानदेय का नियमित भुगतान उन्हें अपने दायित्वों का निर्वहन बेहतर ढंग से करने में सहायता प्रदान करता है।

सरकार का मानना है कि यदि स्थानीय निकाय मजबूत होंगे तो विकास योजनाओं का लाभ भी तेजी से आम लोगों तक पहुंचेगा। यही कारण है कि राज्य सरकार नगर निकायों की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए समय-समय पर सहायता राशि उपलब्ध कराती रही है। वर्तमान स्वीकृति भी इसी नीति का हिस्सा मानी जा रही है।

विभाग ने केवल राशि जारी करने का निर्णय ही नहीं लिया है बल्कि उसके उपयोग को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सभी नगर पंचायतों को निर्देश दिया गया है कि अनुदान राशि का उपयोग केवल निर्धारित उद्देश्य के लिए किया जाए। साथ ही भुगतान और व्यय से संबंधित सभी अभिलेखों को सुरक्षित रखा जाए ताकि आवश्यकता पड़ने पर उनका सत्यापन किया जा सके।

नगर विकास एवं आवास विभाग ने उपयोगिता प्रमाण-पत्र को लेकर भी सख्त निर्देश जारी किए हैं। सभी नगर पंचायतों को अनुदान प्राप्ति के बाद निर्धारित अवधि के भीतर यह प्रमाणित करना होगा कि राशि का उपयोग नियमों के अनुसार किया गया है। इसके लिए 18 महीने की समय सीमा तय की गई है। यदि कोई निकाय समय पर उपयोगिता प्रमाण-पत्र प्रस्तुत नहीं करता है तो भविष्य में मिलने वाली वित्तीय सहायता प्रभावित हो सकती है।

सरकार का यह कदम सार्वजनिक धन के पारदर्शी उपयोग और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि उपयोगिता प्रमाण-पत्र की व्यवस्था से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि सरकारी राशि का इस्तेमाल उसी उद्देश्य के लिए किया गया है जिसके लिए उसे जारी किया गया था।

इस फैसले का लाभ राज्य की सभी नगर पंचायतों को मिलेगा। बिक्रम नगर पंचायत भी उन निकायों में शामिल है जिन्हें इस अनुदान का फायदा मिलेगा। यहां अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और 14 वार्ड पार्षदों के मानदेय भुगतान के लिए लगभग एक लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इसी प्रकार अन्य नगर पंचायतों में भी जनप्रतिनिधियों की संख्या और निर्धारित मानकों के आधार पर राशि आवंटित की गई है।

नगर पंचायतों के जनप्रतिनिधियों ने सरकार के इस निर्णय का स्वागत किया है। उनका कहना है कि नियमित मानदेय मिलने से वे अपने क्षेत्र की समस्याओं पर अधिक प्रभावी ढंग से काम कर सकेंगे। कई प्रतिनिधियों ने इसे स्थानीय निकायों के सशक्तिकरण की दिशा में सकारात्मक कदम बताया है।

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी इस निर्णय की चर्चा है। माना जा रहा है कि सरकार स्थानीय निकायों को मजबूत कर जमीनी स्तर पर विकास कार्यों की गति बढ़ाना चाहती है। यदि भविष्य में भी इसी तरह वित्तीय सहयोग मिलता रहा तो नगर पंचायतों की कार्यक्षमता में और सुधार देखने को मिल सकता है।

फिलहाल राज्यभर की 153 नगर पंचायतों में इस निर्णय को लेकर संतोष का माहौल है। जनप्रतिनिधियों को उम्मीद है कि जल्द ही राशि उनके निकायों के खातों में पहुंच जाएगी और मानदेय भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इससे हजारों निर्वाचित प्रतिनिधियों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा और स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

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